Overview
प्रकाशन सहायता योजना राजस्थान सरकार के जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा वर्ष 2000 में शुरू की गई। इसका उद्देश्य जनजाति विषयों पर शोध एवं साहित्य रचना करने वाले लेखकों को प्रकाशन हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करना है। योजना के अंतर्गत जनजाति से संबंधित शोध ग्रंथ, पांडुलिपि अथवा मौलिक कृति को किसी प्रतिष्ठित प्रकाशन केंद्र से प्रकाशित कराने के लिए अनुसूचित जनजाति के लेखकों को सहायता दी जाती है, जिससे जनजातीय ज्ञान, संस्कृति एवं समस्याओं का दस्तावेजीकरण एवं प्रसार हो सके।
Who it's for
Eligibility
- आवेदक अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग का होना चाहिए।
- प्रकाशित की जाने वाली कृति जनजाति से संबंधित साहित्य, पांडुलिपि अथवा शोध कार्य होनी चाहिए।
- रचना लेखक की मौलिक होनी चाहिए।
- कृति का प्रकाशन किसी प्रतिष्ठित प्रकाशन केंद्र से कराया जाना चाहिए।
Who is not eligible
- अनुसूचित जनजाति के अतिरिक्त अन्य वर्ग के लेखक पात्र नहीं हैं।
- अमौलिक (नकल की गई) रचनाएं पात्र नहीं हैं।
Documents required
How to apply
- 1आवेदन पत्र माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRI), उदयपुर के कार्यालय से प्राप्त करें।
- 2आवेदन पत्र भरकर आवश्यक दस्तावेज (मौलिकता का शपथ-पत्र एवं प्रकाशन केंद्र का कोटेशन) संलग्न करें।
- 3भरा हुआ आवेदन उसी कार्यालय (TRI, उदयपुर) में प्रस्तुत करें।
- 4स्वीकृति के बाद सहायता राशि चेक/DBT के माध्यम से प्रदान की जाती है।
Frequently asked questions
प्रकाशन सहायता योजना में कितनी राशि मिलती है?
जनजाति से संबंधित मौलिक कृति/शोध कार्य को प्रतिष्ठित प्रकाशन केंद्र से प्रकाशित कराने हेतु ₹6,000 से अधिकतम ₹20,000 तक की एकमुश्त सहायता दी जाती है।
इस योजना के लिए कौन पात्र है?
जनजाति विषयों पर मौलिक साहित्य, पांडुलिपि या शोध कार्य करने वाले अनुसूचित जनजाति के लेखक पात्र हैं।
आवेदन कहाँ करें?
आवेदन माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर के कार्यालय में किया जाता है।
Disclaimer: This information is for general guidance only. ClariNexusHub is not a government body. Scheme rules and amounts can change, so always confirm the details and apply on the official portal linked below.