Overview
बिहार के पठारी जिलों में जल की उपलब्धता एवं भूमि की प्रकृति के कारण मत्स्य पालन सीमित रहता है। इस योजना के अंतर्गत पठारी क्षेत्र में नए तालाब के निर्माण तथा उस पर आधारित मत्स्य पालन के लिए 80% तक अनुदान दिया जाता है। प्रति हेक्टेयर इकाई लागत लगभग 13.36 लाख रुपये निर्धारित है, जिस पर अनुदान देय होता है। इसका उद्देश्य पठारी क्षेत्र के किसानों को मत्स्य पालन से जोड़कर अतिरिक्त आय का साधन उपलब्ध कराना है।
Who it's for
Eligibility
- आवेदक बिहार का स्थायी निवासी हो।
- आवेदक के पास पठारी जिले (कैमूर, रोहतास, गया, नवादा, जमुई, बांका, मुंगेर) में स्वयं की भूमि हो।
- भूमि तालाब निर्माण एवं मत्स्य पालन के लिए उपयुक्त हो।
- भूमि से संबंधित वैध स्वामित्व अभिलेख उपलब्ध हो।
Who is not eligible
- इन सात पठारी जिलों के बाहर की भूमि पर यह योजना लागू नहीं होती।
- विवादित अथवा अनुपयुक्त भूमि पर अनुदान देय नहीं होगा।
Documents required
How to apply
- 1विभाग के पोर्टल अथवा जिला मत्स्य कार्यालय से आवेदन प्राप्त करें।
- 2भूमि विवरण एवं दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन जमा करें।
- 3स्थल सत्यापन के बाद चयनित लाभुक को स्वीकृति पत्र जारी किया जाता है।
- 4निर्माण कार्य पूर्ण होने पर अनुदान राशि DBT के माध्यम से खाते में भेजी जाती है।
Frequently asked questions
यह योजना किन जिलों में लागू है?
यह योजना पठारी जिलों — कैमूर, रोहतास, गया, नवादा, जमुई, बांका एवं मुंगेर — में भूमि रखने वाले मत्स्य किसानों के लिए लागू है।
तालाब निर्माण पर कितना अनुदान मिलता है?
तालाब निर्माण आधारित मत्स्य पालन पर 80% तक अनुदान मिलता है, जबकि प्रति हेक्टेयर इकाई लागत लगभग 13.36 लाख रुपये निर्धारित है।
Disclaimer: This information is for general guidance only. ClariNexusHub is not a government body. Scheme rules and amounts can change, so always confirm the details and apply on the official portal linked below.